आज जब भी हम पेट्रोल पम्प पर जाते है, तो एक बात हमेशा दिमाग मे आती है -- पेट्रोल इतना महंगा क्यों है ?क्या इंटरनेशनल मार्केट से इसका कोई लेना देना है ? आईए इस ब्लॉग मे हम आसान भाषा मे समझते है पेट्रोल की कीमतों का पूरा खेल।
1. कच्चे तेल ( crude oil ) की कीमत
पेट्रोल सीधे कच्चे तेल से बनता है। भारत मे पेट्रोलियम का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आता है । जब इंटरनेशनल मार्केट मे कच्चे तेल की कीमतें बरती है, तो इसका डायरेक्ट असर भारत मे पिटोल के दामों पर पड़ती है ।
2. डॉलर के मुकाबले रुपया
भारत कच्चा तेल डॉलर में खरीदता है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो जाता है, तो भारत को ज्यादा रुपया खर्च करने पड़ते है, जिससे पैट्रोल महंगा हो जाता है ।
3. टैक्स का बड़ा हिस्सा
भारत में पेट्रोल पर केन्द्र ओर राज्य सरकारों भारी टैक्स लगता है। कभी-कभी टैक्स पेट्रोल की असली कीमत से भी ज्यादा होता है।
उदाहरण: अगर कच्चे तेल से पैट्रोल की कीमत ₹40 हो, तो टैक्स और अन्य शुल्क मिलाकर ग्राहक को ₹100 तक देना पड़ता है।
4. ट्रांसपोर्ट और डीलर मार्जिन
पैट्रोल को रिफाइनरी से पैट्रोल पम्प तक पहुंचने मे खर्चे होता है -- ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज ओर डीलर का समिशन, ये सब भी कीमत बरते है ।
5. सरकार कीमत क्यों नही कम करती ?
सरकार टैक्स के रुप में बड़ा रेवेन्यू कमाती है इससे योजनाओं ओर सब्सिडी के लिये पैसा आता है। अगर टैक्स कम करे, तो सरकार की कमाई भी घटेगी।
निष्कर्ष
पैट्रोल की कीमतें सिर्फ एक चीज पर निर्भर नहीं करतीं। ये इंटरनेशनल मार्केट, डॉलर का भाव टैक्स और अन्यों खर्चों पर आधारित होती है। अगर हमें सस्ते पेट्रोल की उम्मीद है, तो हमे वैकल्पिक उर्जा स्रोतों की ओर देखना होगा -- जैसे कि इलेक्ट्रिक वाहन ओर सोलर एनर्जी।
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"ये जानकारी मैंने खुद रीसर्च करके ओर अलग-अलग स्रोत से समझकर आप तक पहुंचाई है।
-- kishore bauri"
ब्लॉग: kishore's knowledge corner
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